हुवल्लाहुल्लज़ी ला इलाह इल्ला
इस इस्म को हर दिन जो कोई हज़ार बार पढ़े वह साहिबे यकीन हो जाए।
आलिमुल गयबि वरशहादति
इस इस्म को जो आदमी हर दिन 100 बार पढ़े उसके दिल से फरामोशी व गफलत जाती रहे।
हुवर्रहमानुर्रहीम
इस इस्म को जो आदमी हर दिन 100 बार पढ़े सारी दुनिया उस पर मेहरबान हो जाए।
अलमलिकु
इस इस्म को जो कोई आदमी हर दिन दोपहर के समय 100 बार पढ़े तो गफलत व भूलने की बीमारी उसके दिल से जावे और उसका दिल पाक हो जावे।
अल कुद्दूस या सुब्बूह या कुद्दूस
इस इस्म को जो कोई रोटी के ऊपर लिखकर खाया करे उस आदमी में फरिश्तों की विशेषता पैदा हो जाए।
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अस्सलामु
इस इस्म को जो कोई बीमार की सेहत के लिए हर दिन 100 बार पढ़ा करे तो इन्शाअल्लाह बीमार जल्द आराम पाए ।
अलमुअमिनु
इस इस्म को जो कोई पढ़ा करे या अपने पास रखे तो उस आदमी के ज़ाहिर व बातिन की दौलत हक तआला की अमान में रहे और उस पर कभी शैतान काबू न पावे।
अलमुहयमिनु
इस इस्म को जो कोई हर दिन पढ़ा करे उसके ज़ाहिर व बातिन में नूर पैदा हो।
अलअजीजु
इस इस्म को जो कोई चालीस दिन सुबह की नमाज़ के बाद 41 बार पढ़े तो दुनिया के कामों में किसी का मोहताज न होगा।
अलजब्बारू
इस इस्म को जो कोई “मुसब्बा आते अशर” के बाद 21 बार पढ़े तो वह किसी ज़ालिम व जाबिर के पंजे में गिरफ्तार न होवे।
अलमुत-कब्बिरू
इस इस्म को जो कोई अपनी पत्नी से सोहबत करने से पहले दस बार पढ़े तो उसके नेक बेटा पैदा हो।
अलख़ालिकु
इस इस्म को जो कोई तहज्जुद में कसरत से पढ़ा करे तो अल्लाह तआला फरिश्ते को फरमावे कि कियामत तक तू इबादत किया कर ताकि सवाब इस आदमी के नाम लिखा जावे।
अलबारियु
इस इस्म को जो हर दिन सात बार पढ़े इन्शाअल्लाह तआला उसे कब्र का अज़ाब न होवे बल्कि उसकी लाश फरिश्ते कब्र से उठा ले जावें।
अल मुसब्बिरू
इस इस्म की ख़ासियत यह है कि जो औरत बांझ हो और हमल उसे न रहता हो तो उसे चाहिए कि सात दिन रोज़ा रखे और इफ्तार के समय 21 बार इस इस्म को पढ़कर पानी पर दम करे और उसी पानी से इफतार करे इन्शाअल्लाह सात दिन न गुज़रने पाएं कि उसे हमल रह जावे और नेक बेटा पैदा हो।
अलगफ्फारू
इस इस्म को जो कोई जुमे की नमाज़ के बाद सौ बार इन शब्दों के साथ पढ़े या गफ्फारू इगफिर ली जुनूबी वह माफ किए जाने वालों और मक्बूलों के साथ शामिल हो ।
अल कहहारू
इस इस्म को जो कोई कसरत से पढ़ा करे तो दुनिया की मुहब्बत उसके दिल से जाती रहे और दिल पाक होवे।
अल वहहाबु
इस इस्म को जो कोई चाश्त की नमाज के बाद सज्दे में सात बार पढ़े तो उसे बे नियाज़ी मिले और यदि किसी हाजत के हासिल होने के लिए पढ़ना चाहे तो आधी रात को सेहन मकान या मस्जिद में नंगे सर हाथ उठाकर सौ बार पढ़े। इन्शाअल्लाह उसे कामयाबी मिले।
अरज्जाकु
इस इस्म को जो कोई फज्र की नमाज़ से पहले सुबह सवेरे घर के चारों कोनों में दस दस बार पढ़े तो उस मकान में वे बरकती व तंगी न हो।
अलफत्ताहु
इस इस्म को जो कोई सुबह की नमाज़ के बाद सीने पर दोनों हाथ रखकर 70 बार पढ़े तो दिल का जंग दूर हो भाग्य बढ़े और कभी मोहताज न हो।
अल अलीमु
जो इसे कसरत से पढ़ा करे तो उसे अल्लाह की मारफत हासिल हो और इल्म में कामिल हो।
अलकाबिजु
जो इसे 40 दिन तक हर दिन 40 टुकड़ों पर रोटी के लिखे और खाया करे तो उसे भूख के अज़ाब से नजात मिले।
अलबासितु
इस इस्म को जो कोई सुबह के समय हाथ उठाकर दस बार पढ़े और अपना हाथ मुंह पर मले तो वह कभी किसी का मोहताज न हो।
अल ख़ाफिजु
इस इस्म को जो आदमी सात हज़ार बार पढ़े तो दुशमनों की बदी से नजात पाए।
अर्राफिअु
इस इस्म को जो कोई दिन को या रात को सौ बार पढ़े हक तआला उसे तमाम आफतों व बलाओं से दूर रखे और वह लोगों में इज्ज़त व सम्मान वाला हो जाए।
अलमुअिज्जु
इस इस्म को जो कोई जुमा या सनीचर की रात को मगरिब की नमाज़ के बाद 41 बार पढ़े तो लोगों में प्यारा व मुकर्रम हो जाए।
प्यारे इस्लामी भाइयो और बहनो ये था part 1 जिसमे अल्लाह के 25 पाक नाम और उन्हें पढ़ने की फ़ज़ीलत के बारे में like करे और share करें